Month: September 2021

सितम्बर स्पेशल बागवानी

सितम्बर का महीना मौसम के परिवर्तन का आगाज़ लिए हुए होता है जिसमें बरसात का मौसम खत्म होने वाला होता है और ठंड की शुरुआत होने को होती है ऐसे में तापमान भी 30 से 35 डिग्री सेल्सियस के आसपास होता है।

बागवानी में हमेशा मौसम से ज्यादा तापमान का ध्यान रखना पड़ता है। उत्तर भारत और दक्षिण भारत के तापमान में काफी अंतर है इसलिए पेड़ पौधों के प्रकार और पैदावार में भी विभिन्नता दिखती है।

पेड़ पौधे हमारे लिए कितने ज़रूरी हैं यह किसी से छुपा नहीं है खासकर कोरोना काल में जब ऑक्सीजन के लिये हाहाकर मचा हुआ था ऐसे में बागवानी का शौक बहुत ही फायदे का साबित हुआ है, एक तो यह आपको बिजी रखता है ज्यादा आगे पीछे सोचने का मौका नहीं देता साथ ही यह कई लोगों को बुरी लतों से भी निकलने में बहुत मददगार हुआ है और पौधे बड़े ही भोले और निष्कपट निश्छल होते हैं जो हमें बहुत अंदर तक शन्ति और सुकून का माहौल देते हैं।

आज हम बात करते हैं उन पौधों की जो घर में आसानी से उग जाते हैं और ठंड़ीयों में आपको ऑर्गेनिक सब्जियों और फूलों के साथ हमें स्वस्थ और चुस्त दुरुस्त रखने में मददगार होता है।

इस लिस्ट में सबसे पहले आता है हर दिल अजीज और हर सब्जी में पड़ने वाला टमाटर और धनिया जिसके बीज़ हर घर में आसानी से मिल जाता है और उगाने में भी आसान है।

अगर आपके घर में साबुत धनिया हो जोकि किचन में खड़े मसाला के रूप में प्रयोग किया जाता है उसको मिट्टी के सही कम्पोजीशन में डाल दें शुरुआत में नमी की मात्रा सही रखें।मिट्टी की सही कंपोजीशन के लिए 30% मिट्टी, 30%रेत और 40% वर्मीकम्पोस्ट होना चाहिये।

उसके बाद आता है हरी मिर्च

हरी मिर्च उगाने के लिए भी अलग से बीज़ खरीदने की ज़रूरत नहीं होती जो मिर्च हम घर में प्रयोग करते हैं वह जब लाल हो जाती है उसको सुखाकर उसके बीज़ मिट्टी की सही कम्पोजीशन में डालकर उसी मिट्टी से ढंककर पानी दें। एक हफ्ते में इसकी छोटी पौध आपको देखने मिल जाएगी।

फिर फूल गोभी और शिमलामिर्च

फूलगोभी और शिमला मिर्च भी बीज़ से ही लगते हैं । इनके लिए भी मिट्टी का उचित अनुपात ज़रूरी होता है। मौसम अनुकूल होने से ये भी जल्द ही अंकुरित हो जाते हैं और ठंड आते आते आपको घर में ही ऑर्गेनिक और फ्रेश सब्जियां घर में ही खाने को मिल जाएंगी।

फूलों में गुलदाउदी और डहलिया का फूल मुख्य रूप से है। ये बीज़ के साथ साथ कटिंग से भी लगते हैं। ध्यान रहे कि बीज़ से निकलने वाले पौधे कटिंग की अपेक्षा फल फूल देने में अपेक्षाकृत समय ज्यादा लगाते हैं।

सितम्बर का महीना पौधों को रिपोटिंग यानी कि छोटे गमले से बड़े गमले में शिफ्ट करने के लिए सबसे उपयुक्त होता है साथ ही आप कुछ पौधों की कटिंग्स लगाकर फ्री में ही अपनी बागवानी का विस्तार कर सकते हैं।मैंने भी कुछ कटिंग्स  अभी ही लगाई हैं  और कुछ पौधे उनके बीज से उगाए हैं उनकी फोटोज नीचे हैं।

इसके साथ ही आप घर में प्रयोग आने वाली सब्जियों के बीजों को ही गमलों में लगाकर उसको ऊगा सकते हैं और उनसे पैदा हुई सब्जियों को एन्जॉय कर सकते हैं उनमें कुछ प्रमुख हैं करैला, लौकी, बैंगन, नीम्बू और पुदीना ।

पौधों को लगाने से पहले उसके बारे में थोड़ा जानकारी ज़रूर ले लेनी चाहिए जैसे कि पौधे को किस तरह की मिट्टी  और खाद की ज़रूरत होती है और कितना पानी पर्याप्त होता है। प्राकृतिक परिवेश और ज़मीन में उगने वाले पौधों की बात अलग होती है लेकिन हम इन पौधों को गमलों में और महानगर की बालकनी में उगाकर अपना शौक पूरा करने के साथ ही पर्यावरण को शुद्ध और स्वच्छ रखने में योगदान दे सकते हैं। बस ध्यान यह रखना है कि हम उनके लिए बहुत सीमित साधन दे पा रहे इसलिए उनको ज्यादा देखभाल की ज़रूरत होती है।

हिंदी भाषा ::फिर वही सम्मान दिलाना है

बरसों रहे गुलामी में हम

आज़ादी कहाँ से भाएगी

अपनी भाषा अपना देश

सबसे बढ़िया कहने की हिम्मत कहाँ से आएगी

सत्ता की खातिर सबने बंटवारा क्या खूब किया

देश को बांटा कई हिस्सों में

लोगों को अंग्रेजी के आधीन किया

अपनी भाषा अपनी शैली पर शर्म हमें आती है

अंग्रेजी भाषा और पाश्चात्य शैली हमेशा हमें लुभाती है।

कहने को राष्ट्रभाषा है हिन्दी

पर उसकी याद हमें एक दिन ही आती है।

आज भी उनसठ,उनहत्तर, उन्यासी, नवासी

हममें से बहुतों को समझ नहीं आती है।

हिंदी दिवस की शुभकामनाएं भी हम अंग्रेजी में देते हैं

बच्चों को अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाकर

खुद में ही इतराते हैं।

कैसे होंगे  हम स्वाधीन जब तक ऐसी सोच है।

हिंदी भाषा अपने घर में ही सबपर बोझ है।

अपनी मातृभाषा को फिर वही सम्मान दिलाना है

किसी और भाषा के आगे इससे नहीं शर्माना है

अब हर हिंदुस्तानी ने यह ठाना है

 

कुछ अधूरे से ख्वाब

कुछ अनकहे अनसुने से फ़क़त बन्द आँखों में

उभरी कुछ लकीरों तक ही रह गए

कुछ अनबुने अधूरे से वो ख्वाब

कई कई बार अधूरी नींद में मांगते वो मुझसे जवाब

जो जुनून में थे शामिल जिनके लिए

हद से गुज़र जाने की थी तमन्ना

आज भागते फिरते हैं उनकी एक परछाई से

न जाने कौन से मोड़ पर सामने हो कोई

दूर मंजिल लम्बा सफर है

साथ केवल मैं और मेरी ही परछाई

नसीब में मेरे अपनों की है रुसवाई

शिकायत और किससे ही करू मैं

नहीं कोई कहीं भी है मेरी सुनवाई

दोष किसका भी नहीं और न ही कोई है पुछवाई

अब है केवल बढ़ते रहना

एक मंजिल ना सही रास्ते और भी हैं

खुद से सोचो खुद को समझो

है बहुत से और भी तरीके

खुद को जिस दिन जान लोगे

अपनी कुछ ठान लोगे

होगी पूरी कायनात संग

जीत जाओगे तुम फिर हर जंग