
(यह चित्र शिखरेश्वर मंदिर का है और यह श्रीशैलम का सबसे ऊँचा स्थान है यह धाम भगवान शिव के ही एक स्वरुप को ही समर्पित है )
नमस्कार दोस्तों धन्यवाद मेरे ब्लोग्स को अपना समय देने के लिए। सच तो यही है की ये आपलोगों का प्यार ही है जो हमे लिखने को प्रेरित करता है। अगर आप मेरे ब्लोग्स पढ़ रहे हैं तो आपको पता होगा की जनवरी की कड़कड़ाती ठण्ड में हम अभी यात्रा करते हैं दक्षिण भारत की और हर साल की तरह इस साल भी प्लान किया दक्षिण की तरफ। दिल्ली से विशाखापट्टनम ट्रैन द्वारा तय करना बड़ा ही रोमांचकारी और अद्भुत अनुभव रहा यह यात्रा 36 घंटे की रही जो वाकई धैर्य का अटूट परिक्षण होता है और हमने ये परीक्षा उत्तीर्ण की और पहुँच गए विशाखापत्तनम। वहां पर 2 से 3 दिन का विश्राम करने के बाद हम निकलते हैं अपनी यात्रा के अगले पड़ाव की तरफ जो इस बार हमें अपनी डायरी में जोड़ना था और वो जगह थी श्रीशैलम जिसको दक्षिण का कैलाश भी कहा जाता है। मुझे पता है की कैलाश का नाम सुनकर आपको बर्फ़ से ढंके हुए पहाड़ और महादेव जरूर याद आए होंगे।
मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग 12 पवित्र ज्योतिर्लिंगों में द्वतीय स्थान पर है। यह आन्ध्र प्रदेश में कृष्णा नदी के तट पर श्रीशैल नाम के पर्वत पर स्थित है। इस मंदिर को दक्षिण का कैलाश पर्वत कहा गया है। महाभारत में दिए वर्णन के अनुसार श्रीशैल पर्वत पर भगवान शिव का पूजन करने से अश्वमेध यज्ञ करने के सामान फल प्राप्त होता है। माता पार्वती का नाम ‘मल्लिका’ है और भगवान शिव को ‘अर्जुन’ कहा जाता है। इस प्रकार सम्मिलित रूप से वे श्रीमल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग के नाम से यहाँ निवास करते है। मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग देवी का महाशक्तिपीठ भी है। यहाँ माता सती की ग्रीवा (गरदन या गला) गिरी थी।
जैसा की आपको पता ही है की अक्टूबर से फरवरी का महीना दक्षिण घूमने का आदर्श मौसम होता है। उसके बाद वहां काफी गर्म और उमस वाला मौसम हो जाता है।चूँकि मैं दिल्ली से विजयनगरम तक का सफर वाया ट्रैन से गई थी तो ३६ घंटे ट्रैन में रहने का कठिन प्रयास और खूबसूरत रास्तों को अपने मेमोरी में रखना भी था इसके साथ ही थोड़ी स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों की वजह से हम कुछ दिन रुक कर अपनी श्रीशैलम की यात्रा को शुरू किये और अपनी कार से इसलिए प्लान किया ताकि जहा जैसी जरुरत हो तो उस हिसाब से विश्राम कर सके साथ ही ज्यादा लगेज लेकर जगह जगह भटकना न पड़े। विजयनगरम से हमने सुबह 6,7 बजे के आसपास स्टार्ट कर दिया था क्यूंकि यहां से 12 घंटे की यात्रा थी और हमने सुना था की श्रीशैलम से पहले अभ्यारण्य है जो 1 घंटे का रास्ता है और वहां जंगली जानवर सड़कों पर आ जाते इसलिए शाम 6 बजे से सुबह 6 बजे तक नो एंट्री रहती इसलिए हमको वो अभ्यारण्य शाम 6 बजे से पहले पार करना था।
और हम समय से पहले ही पहुँच गए यहां पहुंचकर हम अपने होटल में चेक इन किया जो हमने ऑनलाइन बुक किया था यहां रुकने की व्यवस्था काफी अच्छी है आंध्र प्रदेश टूरिज्म के तरफ से आपके बजट को ध्यान रखते हुए काफी अफोर्डेबल प्राइस में आपको होटल मिल जाएंगे। एक व्यवस्था और देखने को मिली की यहां आपको अपना काम स्वयं करना होता। जैसे मुझे 4th फ्लोर पर अपना लगेज खुद ही लेकर जाना पड़ा कोई लिफ्ट या सहायक उपलब्ध नहीं थे तो जब भी जाएँ अपना लगेज ऐसा रखें की खुद उठाकर ले आ पाएं।
रात भर विश्राम करके सुबह 4 बजे से ही दर्शन प्राम्भ हो जाते हैं। दर्शन के लिए अच्छी लाइन लगती है। यहां दर्शन के लिए अलग अलग प्रकार के टिकट लगते जो आप इनकी ऑफिसियल वेबसाइट से पहले भी बुक कर सकते या मंदिर में लाइन में लगकर भी ले सकते।
तीन तरह के टिकट होते
शीघ्र दर्शन 150 रस पर पर्सन
अति शीघ्र दर्शन 300
स्पर्श दर्शन 500
ड्रेस कोड
दक्षिण भारत के अधिकतर मंदिरों में दर्शन के लिए ड्रेस कोड होता है स्त्रियों के लिए साडी या सलवार सूट और पुरुषों के लिए कुरता / शर्ट धोती अनिवार्य होता है। स्पर्श दर्शन एक परिवार से एक व्यक्ति कर सकता है।
श्रीशैलम के आसपास घूमने की जगहें
श्रीशैलम पातालगंगा
-
साक्षी गणपति मंदिर – 2 किमी दूर, भगवान गणेश को समर्पित।
-
पातालगंगा – पवित्र नदी, लगभग 500 सीढ़ियाँ।
-
श्रीशैलम बांध – पनबिजली परियोजना, प्राकृतिक दृश्य।
-
नागार्जुनसागर टाइगर रिजर्व – जीप सफारी और वन्यजीव दर्शन (सुबह 7:00 – शाम 5:00, न्यूनतम ₹800) ।
- हाटकेश्वर मंदिर
- शिखरेश्वर मंदिर
श्रीशैलम का प्रमुख पर्यटन स्थल कृष्णा नदी को पाताल गंगा कहा जाता है। पाताल गंगा जाने के दो रास्ते है। एक जिसमे नदी तक पहुंचने के लिए लगभग 500 सीढिया उतरकर नीचे जाना पड़ता है। दूसरा रास्ता रोप से जाता है। रोपवे से जाना बहुत रोमांचकारी अनुभव होता है। बहुत ऊंचाई से कृष्णा नदी, हरे-भरे घने जंगल और श्री शैलम डेम का अद्भुद प्राक्रतिक नजारा दिखाई देता है। पाताल गंगा में डुबकी लगाने पर पुण्य की प्राप्ति होती है।
श्रीशैलम टाइगर रिज़र्व बहुत बड़ा टाइगर रिज़र्व भी है यहां लेकिन अपने ख़राब स्वास्थ्य और समयाभाव के कारण हम नहीं देख पाए
श्रीशैलम बांध
- श्रीशैलम बांध- कृष्णा नदी पर बना श्रीशैलम बांध दक्षिण भारत के सबसे बड़े बांधों में से एक है।श्रीशैलम में घूमने के लिए श्रीशैलम डैम बहुत एक खूबसूरत स्थान है। पाताल गंगा पहुचने के बाद आप बोट से नदी और डैम की सैर कर सकते है। बोट से श्रीशैलम डैम धूमते समय नल्लमाला पहाड़ियों की खूबसूरत हरियालियों के बीच कृष्णा नदी का विहंगम द्रश्य बहुत खूबसूरत लगता है। कृष्णा नदी पर स्थित श्रीशैलम बांध देश में दूसरी सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजना है। दिन के उजाले में डैम की 290 मीटर की ऊंचाई से गिरते पानी के द्रश्य आपको रोमांचित कर देता है।
साक्षी गणपति मंदिर
सबसे पहले साक्षी गणपति जी के दर्शन होते एंट्री करते ही ऐसा माना जाता की आपने यहां दर्शन किये इसका लेखा जोखा यही रखते।
हाटकेश्वर मंदिर
हाटकेश्वर महादेव मंदिर भी दर्शन करने के लिए एक महत्वपूर्ण स्थल है। श्रीशैलम हाटकेश्वर महादेव उत्तर भारत में स्थित एक प्राचीन शिव मंदिर है। इसे भगवान शिव के पंचमुख या शक्तिशाली रूपों में स्थापित स्थानों में गिना जाता है। यह मंदिर श्रद्धालुओं के लिए धार्मिक अनुभव और शांति प्राप्त करने का महत्वपूर्ण स्थल माना जाता है।
यहां दर्शन करने के बाद तरोताज़ा होते हुए और ढेरों खुशनुमा यादें समेटे हुए हम वापस विजयनगरम के लिए वापस होते हैं। रोड ट्रिप की एक बड़ी अच्छी बात होती है की रास्ते की प्राकृतिक सुंदरता का सजीव अनुभव होता है साथ ही साथ खाने पीने के भी विविध और परम्परागत व्यंजन आपके सुविधानुसार मिल जाते हैं।