जानी पहचानी और भीड़ भाड़ वाली जगहों के बारे में तो बहुत लोग बताने वाले मिल जाएंगे लेकिन कई बार मन करता है की इन कोलाहल पूर्ण वातावरण से दूर कही शांति से अपनी छुट्टियां बीते जाए और सारी थकान और तनाव सब वही छोड़कर आया जाए तो हम आपको इस बार ऐसी ही जगह ले चलते हैं जिसे मैंने अभी फ़िलहाल न सिर्फ आँखों से देखा पूरी तरह जीया भी यकीन मानिये ये छुट्टी जैसी चाही थी उस से भी ज्यादा खूबसूरत थी तो ज्यादा प्रतीक्षा न करवाते हुए आपको जगह का नाम बता ही देते हैं यह जगह है कोरापुट जो की ओडिशा प्रान्त में पड़ता है और आंध्र प्रदेश और ओडिशा के सीमा से ही लगा हुआ है।
कोरापुट को प्रकृति ने भरभर कर प्यार दिया है और बहुत फुर्सत में तराशा है। शहर के शोर शराबे से दूर बहुत ही सुकून का वातावरण मिला यह आकर। भागदौड़ और तनाव तो कुछ दिन जेहन से एकदम गायब ही हो गया था।
कोरापुट पहुँचने के लिए हमने तो रोड ट्रिप चुनी थी और रोडसाइड प्राकृतिक खूबसूरती और शांत वातावरण का अनुभव बहुत ही सुकून देने वाला था बाकि आप चाहे तो ट्रैन द्वारा कोरापुट सीधे ही बड़े शहरों से जुड़ा हुआ है। हाँ अगर आप हवाई यात्रा करना चाहते हैं तो या तो आपको विशाखापट्टनम उतरकर वहां से ट्रैन या सड़क यात्रा करनी पड़ेगी या तो फिर जयपुर तक भी फ्लाइट जाती है जो कोरापुट से २२ की दुरी पर है। हमने अपनी यात्रा जनवरी में की थी उस समय जब उत्तर भारत एकदम ठंड में कंपकंपा रहा था उस समय यहां का मौसम बहुत खुशनुमा था।
यहां के लोग भी बड़े इत्मीनान से और अपने पारम्परिक तरीके से ही रहते हैं।यही पर एक बड़ा डियर पार्क भी हैं ये दोनों ही जगह जाकर मेरे बच्चे बहुत खुश हुए।
HAL museum
सबसे पहले हमने शुरुआत की कोरापुट से ४० km पहले सिमलीगुड़ा में स्थित HAL
के फेमस संग्रहालय से जोकि बड़ो बच्चो सभी को बहुत आकर्षित और रोमांचित करता है।
चूँकि हम सेमलीगुड़ा ही रुके थे तो वहां से सड़क मार्ग से ही डुडुमा जलप्रपात के लिए निकले रास्ता बहुत ही खूबसूरत था हरे भरे प्राकृतिक वादियों के साथ ही साथ पहाड़ और खेत में तरह तरह के फसल भी देखने को भी मिला। यहां की जनजात्तियाँ अपने घरों और आसपास के जगह को बड़े ही खूबसूरत और सलीके से रखते हैं।
यहां पर हमने एक बड़ी मजेदार चीज देखी यहां प्रवेश द्वार पर सिंह प्रतिमूर्ति रखने का अनोखा रिवाज है।
रानी डुडुमा जलप्रपात
कोरापुट से ४०कम दूर रानी डुडुमा जलप्रपात है जो वास्तव में कला और प्रकृति का अनूठा संगम है। बहुत से जोड़े अपने प्रे वेडिंग सूट के लिए इसको परफेक्ट मानकर अपने जीवन की एक यादगार स्मृति बनांने में व्यस्त थे।
हमने भी कुछ खूबसूरत यादों को अपने यादों के गुल्लक में समेटा और वहाँ से आगे बढ़े।
मत्स्याकुण्ड से निकलकर एक डुडुमा जलप्रपात और मिला जिसको देखकर लगा की ३ तरफ से पहाड़ियां आपस में आलिंगन करते हुए प्रपात निकालने की होड़ में हैं।
वाकई अद्भुत दृश्य था लेकिन रेलिंग लगे होने की वजह से काफी दूर से हमे देख पा रहे थे फिर ध्यान से देखने पर एक थोड़ा जोखिम वाला रास्ता दिखा जो हमे निचे तक ले जाता था वहा पहुंचकर लगा की वाकई यहाँ आना सफल हो गया अगर आप वहां तक जाते हैं तो निचे तक जाने का जोखिम जरूर लीजियेगा वरना कुछ अधूरा ही छूट सकता है।
गुप्तेश्वर महादेव मंदिर
वहां से आगे हम गुप्तेश्वर महादेव मंदिर गए अध्यात्म और प्रकृति का अनूठा संगम है ये। मंदिर में कुछ निर्माण कार्य चल रहा था लेकिन श्रध्द्धालुओं की श्रद्धा में कोई अंतर नहीं था और न ही अंतर् था उनकी तादाद में। यहां का गुप्तेश्वर मंदिर काफी प्रसिद्ध है ऐसी मान्यता है की यहां के शिवलिंग हर साल थोड़े बढ़ते रहते हैं इसलिए इनके दर्शर्नाथ श्रद्धालु बहुत दूर दूर से आते हैं। वही पर गुप्तगंगा के भी दर्शन हुए। साथ ही साथ कुछ जड़ी बूटियां भी दिखी जो सिर्फ वही पाई जाती हैं।
यहां से आगे गुप्त गंगा भी हैं और वहां लोग स्नान का भी आनंद ले रहे थे।
कोलाब डैम
आगे कोलाब डैम भी एक रमणीक स्थल है और वहां एक स्कूल की ट्रिप भी आई थी देखकर अपना स्कूल टाइम याद आ गया कोलाब डैम के पास में ही काफी अच्छा बगीचा तैयार किया गया है खासकर बच्चो के हिसाब से तो काफी क्रिया कलाप हैं यहां करने के लिए।
देवमाली
देवमाली उड़ीसा का सबसे ऊँचा पॉइंट है इसको भारत का स्विट्ज़रलैंड भी कहते हैं। यहां जाने का रास्ता ही बड़ा घुमावदार और रोमांचक है। अगर आप गाड़ी चलाने के अभ्यस्त नहीं है तो वहां का लोकल ट्रांसपोर्ट लेना ज्यादा अच्छा विकल्प है क्यूंकि टेढ़ी मेढ़ी घुमावदार सड़कें तो अच्छे अच्छों के छक्के छुड़ा दें। गाडी भी एक पॉइंट तक ही जाती है उसके बाद आपको ट्रैकिंग ही करनी पड़ती है। इसलिए अगर आप देवमाली घूमने का प्लान कर रहे तो पूरा दिन लेकर आये और यहां की खूबसूरती का आनंद ले ।