पहाड़ो की रानी मंसूरी

पहाड़ो की रानी कहे जाने वाली मंसूरी की खूबसूरत वादियों में खोने का मन किसका नहीं होता यह तो वह खूबसूरत सपना है जो सिर्फ भारतीय ही नहीं विदेशी सैलानियों का भी होता है, तो इन या आने वाले छुट्टियों में खासतौर पर गर्मी के मौसम में मंसूरी का प्लान बना ही डालिये और हमे अपने विचार जरूर साझा करिये।
अगर किसी ने मंसूरी या उसके आस पास की यात्रा पहले भी की हो तो वो भी किसी अच्छे रिसोर्ट या होटलस में एक जगह पर रुक कर पहाड़ो को एन्जॉय करना भी पसंद करते हैं। हमे भी मंसूरी की खूबसूरत वादियों में अभी बीती गर्मियों में अपना वक़्त बिताने का मौका मिला और वह अनुभव साझा किये बिना मैं खुद को रोक नहीं पा रही हूं, तो चलिए शुरुआत करते हैं।

मार्च से लेकर जून तक का बेहतरीन समय होता है मंसूरी घूमने का जब नार्थ इंडिया में गर्मी अपने रंग में होती हैं और बच्चे छुट्टी में कही बाहर चलने की ज़िद करने लगते हैं । वैसे तो मंसूरी जाने के लिए दिल्ली से देहरादून तक हवाई मार्ग सबसे जल्दी पहुँचने का आसान रास्ता है । लेकिन हम लोगो ने रास्ते का आनंद लेने के लिए दिल्ली से देहरादून रोड जर्नी से प्लान किया। उत्तरखंड और उत्तर प्रदेश परिवहन की टूरिस्ट बसेस भी अच्छा तरीका हो सकती हैं । देहरादून सेआगे आपको 35 km ही बचते हैं मंसूरी के लिए, लेकिन ये 35 km समतल मार्ग की तुलना में आपको लगभग दुगुना समय लगाएंगे क्यूंकि पूरा रास्ता पहाड़ियों पर गोल गोल घुमाते हुए बीतता है । इसलिए अगर आप ड्राइविंग में एक्सपर्ट नहीं हैं तो कैब कर लेना ज्यादा बढ़िया होता है उससे आप वाक़ई में छुट्टियां रिलैक्सिंग मोड में बिता सकते हैं साथ ही साथ पहाड़ों की खूबसूरती और वहां की शुद्ध हवा एकदम अंदर तक महसूस क्र सकते हैं।

वैसे तो पहाड़ों की खूबसूरती वहां की हरियाली को नजदीक के महसूस करने, शांति का आनंद और सुकून से समय बिताना, वहां का सूर्योदय और सूर्यास्त देखना भी अपने आप में एक खूबसूरत नज़ारा रहता है। बाकि हर शहर के अपने कुछ पॉइंट्स होते हैं जो विजिट के दौरान कवर करना ही होता है। वैसे ही मंसूरी के कुछ पॉइंट्स है लाल टिब्बा, केम्पटी फॉल, जॉर्ज एवेरेस्ट, हांथी पाँव, कंपनी गार्डन जिनका हमने भी अपनी मंसूरी यात्रा में आनंद लिए ।

लाल टिब्बा केवल सीनिक और ट्रेकिंग पॉइंट है वहां से घाटियों का नज़ारा, वहां का सूर्योदय और सूर्यास्त देखना अच्छा अनुभव देता हैं और मंसूरी शहर वालो के ले लिए घूमने हैं मुख्य स्थान भी हैं ।

केम्पटी वाटर फॉल -यह वॉटरफॉल देश के सबसे ऊँचे झरनो में एक है। यह वाटर फॉल दो तीन लेवल या हाइटका है, अगर आप को इत्मीननान से समय देना हो तो पूरा दिन भी दे सकते है, गाड़ी की पार्किंग भी पुरे दिन के हिसाब से ही रहता है। समय के हिसाब से लोग ऊपर या नीचे वाले वाटर फॉल में नहाने का मजा उठाते मिल जायेगे ।

जॉर्ज एवेरेस्ट पीक 3 km ट्रेकिंग का अच्छा ऑप्शन है और सुबह जल्दी शुरुआत करें तो ऊपर पहुंचकर शिवालिक रेंज की सफ़ेद घाटियां बहुत विहंगम नज़ारा देती हैं। जॉर्ज एवेरेस्ट का घर और लेबोरेटरी भी हैं जो आमतौर पर पब्लिक ले लिए बंद होती हैं पर अंग्रेजी इतिहास का प्रतीक जरूर हैं ।

हाथी ताल एक आर्टिफीसियल तालाब बनाया गया हैं जो मंसूरी के रास्ते में ही पड़ता हैं को बोटिंग, वाटर स्पोर्ट्स, एडवेंचर्स स्पोर्ट्स के साथ ही साथ टाइप टाइप के स्नैक्स एन्जॉय करने और समय बिताने और उत्तरखंड की ट्रेडिशनल ड्रेसेस में फोटो खिचवाने का भी अच्छा पॉइंट हैं ।

बर्फ के शौक़ीन लोगो को दिसंबर फेबुरारी में मंसूरी की यात्रा करनी चाहिए जब पूरी पहाड़िया बर्फ की सफ़ेद रंग से कवर हो जाती हैं, हमारी यह यात्रा अभी बाकि हैं ।
अगर आप के पास 5-6 दिन का समय हो तो आस पास के टूरिस्ट प्लेसेस तो भी विजिट कर सकते हैं, जैसे देहरादून, धनोल्टी ।

देहरादून वैसे तो समतल भाग में आता है लेकिन यह भी काफी खूबसूरत जगह है और मंसूरी के रस्ते में ही पड़ता है तो पूरा एक दिन यहां भी बिताया जा सकता है। यहां घूमने लायक स्पॉट्स में सहस्त्रधारा, रॉबर्स केव या गुच्छूपानी साथ ही मालसी डिअर पार्क और देहरादून ज़ू खास हैं।

टपकेश्वर महादेव मंदिर यहाँ का बहुत जाना माना मंदिर है यहां की छत से महादेव शिवलिंग पर बून्द बून्द जल टपकता है यहीं से इस मंदिर का नाम टपकेश्वर पड़ा।

ऐसी मान्यता है की महाभारत काल में यहां गुरु द्रोणाचार्य ने महदेव की तपस्या की थी और महादेव ने खुश होकर उन्हें अश्व्थामा को वरदान के रूप में दिया था। यहां माँ वैष्णो की गुफा भी है साथ ही आसान नदी का किनारा इस जगह को काफी मनोरम बनाता है। भगवान के दर्शन के उपरान्त आप कुछ देर शांति से बैठकर प्रकृति की अद्भुत रचना को महसूस कर सकते हैं।

धनोल्टी में मंसूरी जैसे भीड़ नहीं हैं, सिर्फ सीनिक और प्योर माउंटेन जंगल हैं जिन्हे वह रुक कर महसूस और जिया जा सकता हैं।बस ऐसा लगता हैं की समय यही रुक जाये।

वैसे तो इंटरनेट पर देखने में हिल स्टेशन धनोल्टी, चकराता आसपास  दीखते हैं पर अगर खुद ड्राइव करना हो तो समय लेकर निकले और गाड़ी में ईंधन पर्याप्त मात्रा में हो, साथ ही साथ पहाड़ियों की गोल गोल घुमावदार सिंगल वे ड्राइविंग के लिए तैयार हो तभी और किसी हिल स्टेशन का एडवेंचर का रिस्क ले।

हमे किसी ने बताया की देहरादून से धनोल्टी का रास्ता बहुत बढ़िया है लेकिन हमारा खुद का अनुभव बहुत बढ़िया नहीं रहा छुट्टियों का समय होने की वजह से ट्रैफिक बहुत होने के साथ ही सिंगल लेन और खतरनाक सड़क होने की वजह से बहुत सांस रोककर यात्रा पूरी हुई लेकिन धनोल्टी पहुंचकर वहां इको पॉइंट पर जाकर बड़ा ही सुकून मिला और इतना एडवेंचर करना पूरा वसूल हो गया।

बारिश में हरे भरे पहाड़ और उचाई से गिरते झरने को देखने का अपना रोमांच होता हैं पर उस समय यात्रा करना थोड़ा रिस्की रहता हैं पर अडवेंचरस लोगो को कौन रोक सका हैं ।

लेकिन पहाड़ो में यात्रा में कुछ चीज़े ध्यान में रखने जैसे टायर्स की कंडीशन और हवा ठीक हो, फ्यूल जर्नी के हिसाब से हो, ब्रेक्स की जांच कर ले, लेन में ड्राइव करे, ओवरटेक या ओवरस्पीडिंग से बचे, थोड़ा जरूरी रासन साथ में रखे खासतौर से यदि बच्चे और बड़े बुजुर्ग हो, इंटरनेट न होने की स्तिथि में ऑफलाइन मैप, रात में ड्राइविंग न करनी पड़े इसलिए समय ले कर चले । इन सब से आपकी पहाड़ो पर मंसूरी जैसे जगह की यात्रा सेफ और  यादगार रहेगी । अगर आपने भी मंसूरीकी यात्रा की हो तो अनुभव जरूर शेयर करे और ब्लॉग पर आपके व्यूज आमंत्रित हैं ।

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