केरल के बैकवाटर्स से मदुरै के मंदिरों तक: मेरा आँखों देखा सफरनामा

कुछ यात्राएं केवल नक्शे पर दूरी तय करने के लिए नहीं होतीं, बल्कि आत्मा को सुकून देने के लिए होती हैं। हाल ही में मैंने दक्षिण भारत के तीन बेहद खूबसूरत और अलग मिजाज वाले स्थानों की यात्रा की—तिरुवनंतपुरम (त्रिवेंद्रम), पूवर बैकवाटर्स, और मदुरै।यह कोई इंटरनेट से कॉपी की गई ट्रैवल गाइड नहीं है, बल्कि यह मेरा वो अनुभव है जो मैंने खुद जिया है, जो मैंने अपनी आँखों से देखा और महसूस किया है।इस सफर में एक तरफ जहाँ पद्मनाभस्वामी मंदिर की भव्यता और रहस्यमयी शांति थी, वहीं दूसरी तरफ पूवर के शांत बैकवाटर्स और समंदर का वो मिलन था जिसे देखकर आँखें ठहर गईं। और जब यह सफर आगे बढ़कर मदुरै की जीवंत गलियों और मीनाक्षी मंदिर की बेमिसाल वास्तुकला तक पहुँचा, तो लगा जैसे इतिहास खुद मुझसे बात कर रहा हो।आइए, आपको ले चलती हूँ मेरे इस खूबसूरत और यादगार सफर

पूवार बीच और बैकवाटर्स

अगर आप केरला में हैं तो बैकवाटर बोटिंग का लुत्फ़ जरूर उठाए बैकवाटर समुद्र का वो पानी है जो तटीय इलाकों में आ तो जाता है लेकिन इसकी घरवापसी के सारे रस्ते बंद हो जाते हैं यानी वो वापस समुद्र में कभी नहीं जा पाता। इस पानी का तटीय क्षेत्र के लोग अपने हिसाब से प्रयोग करते हैं ऐसे ही एक क्षेत्र पूवार बीच और बैकवाटर्स देखने सुनने और महसूस करने का अवसर मुझे भी मिला जिसका आँखों देखा हाल आपसे साझा करने के लिए मैं बहुत ही आतुर हूँ

यहां के फ्लोटिंग बोट हाउसेस और रिसॉर्ट्स रुकने के लिए काफी बढ़िया हैं साथ ही साथ हनीमून कपल्स के लिए भी ये बहुत उपयुक्त जगह है हमने भी मोटरबोट की राइड बहुत एन्जॉय की किनारे लगे नारियल और चीड़ के पेड़ों के बीच से गुजरना वाकई बहुत ही अद्भुत था साथ ही प्राकृतिक दृश्यों के साथ चिड़ियों और समुद्री जीवों को देखना बहुत सुकून दे रहा था ऐसा लग रहा था समय कुछ देर थम सा गया है।

श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर

श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में स्थित एक प्रमुख धार्मिक स्थल है जिस पर सोने की परत चढ़ी हुई है। आपको बता दें कि यह मंदिर 108 दिव्य देशमों में से एक है, जो वैष्णववाद के धर्म में पूजा का प्रमुख केंद्र हैं।

तिरुअनंतपुरम शब्द का संधि विच्छेद किया जाये तो ये तिरु +अनंत +पुरम होगा। दक्षिण भारत में तिरु का मतलब श्री होता है जो किसी को सम्मान देने के लिए लगाया जाता है अनंत मतलब भगवान विष्णु के शैया शेषनाग से है और पुरम का मतलब घर होता है। तिरुअनंतपुरम या त्रिवेंद्रम केरल की राजधानी और एक खूबसूरत शहर है।

पद्मनाभस्वामी मंदिर में भगवान विष्णु के अवतार भगवान पद्मनाभ की पूजा की जाती है। यह दिव्य मंदिर भारत के उन गिने-चुने मंदिरों में से एक है जहाँ केवल हिंदू धर्म के लोग ही प्रवेश कर सकते हैं। मंदिर का रहस्य और भव्यता हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करती है। अगर आप शांति का अनुभव करना चाहते हैं तो आपको इस मंदिर की यात्रा अवश्य करना चाहिए।

पद्मनाभस्वामी मंदिर अपने सख्त नियमों के लिए जाना जाता है। यहाँ आने वाले भक्तों को विशिष्ट ड्रेस कोड का पालन करना होता है। इन सब के बावजूद भी भक्त बड़ी संख्या में इस मंदिर के दर्शन करने के लिए आते हैं। अगर आप पद्मनाभस्वामी मंदिर के दर्शन करने जाना चाहते हैं या मंदिर के अन्य जानकारी चाहते हैं तो इस लेख को जरुर पढ़ें, जिसमे हम आपको पद्मनाभस्वामी मंदिर के दर्शन के बारे में पूरी जानकारी दें जा रहें हैं –

तिरुवनंतपुरम के श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर में प्रवेश के लिए ड्रेस कोड –

श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर एक सख्त ड्रेस कोड का पालन किया जाता है। बता दें कि यहां पर महिलाओं को साड़ी, मुंडु नीरथुम (सेट-मुंडू), स्कर्ट और ब्लाउज पहनना आवश्यक है। यहां मंदिर में आने वाली 12 साल से कम उम्र की युवा लड़कियां गाउन पहन सकती हैं। पुरुषों को इसी तरह मुंडू या धोती पहनना होता है। बता दें कि यहां पर मंदिर के प्रवेश द्वार के पास किराए की धोती आसानी से उपलब्ध हैं। आजकल मंदिर में भक्तों को असुविधा से बचने के लिए इस संबंध में थोड़ी छूट दी गई है।

 

पद्मनाभम मंदिर की खास बात यह है की यहां लेटे हुए जगत पालन करता भगवान विष्णु हर दर्शनार्थी को उसके नज़रिये से ही दिखते हैं। उसके दो कारण हैं एक तो मूर्ति का आकार बहुत बड़ा है दूसरे आप किस भाव से उनके दर्शन अभिलाषी हैं कई लोग उनके आसपास रखी छोटी मूर्तियों में ही श्रद्धालीन हो जाते हैं और उनको इसके अलावा और कुछ नहीं दिखत। यहां ये कहावत बिलकुल फिट बैठता है। जाकी रही भावना जैसी हरी मूरत देखि तीन तैसी।

पद्मनाभस्वामी मंदिर की यात्रा के लिए सबसे अच्छा समय –

अगर आप पद्मनाभस्वामी मंदिर की यात्रा करने की योजना बना रहें हैं तो बता दें कि यहां त्रिवेंद्रम की यात्रा के लिए अक्टूबर से फरवरी का समय सबसे अच्छा है, क्योंकि सर्दियों का मौसम बहुत सुहावना होता है जो पूरे साल में यात्रा करने के लिए सबसे अच्छा समय हैं। ग्रीष्मकाल के समय यहां बेहद गर्मी पड़ती और मानसून अपेक्षाकृत ठंडा होता है।

मदुरै मिनाक्षी देवी मंदिर

मदुरै तमिलनाडु का एक बहुत प्यारा शहर है इसको मंदिरों का शहर भी कहते हैं ये दक्षिण का मथुरा भी कहा जाता है।

 

 

शाम को पद्मनाभ मंदिर दर्शन के बाद हमलोगो ने आराम किया और अगले दिन मदुरै के लिए निकल गए वहां से रोड ट्रिप 5 से ६ घंटे तय करने के बाद हम मिनाक्षी देवी मंदिर पहुंच। श्रद्धालुओं की बहुत लम्बी लाइन में लगकर माँ के दर्शन किये ।  ऐतिहासिक मीनाक्षी अम्मन मंदिर तमिलनाडु के मदुरई नदी के दक्षिणी तट पर स्थित है। वर्ष 1623 और 1655 के बीच निर्मित, इस जगह की अद्भुत वास्तुकला विश्व स्तर पर प्रसिद्ध है। मीनाक्षी मंदिर मुख्य रूप से पार्वती को समर्पित है, जिसे मीनाक्षी और उनके पति, शिव के रूप में जाना जाता है। इस मंदिर का तथ्य यह है कि भगवान और देवी दोनों को एक साथ पूजा जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव पार्वती से शादी करने के लिए मदुरै आए थे । इसलिए मीनाक्षी मंदिर का निर्माण यहां किया गया था ताकि उसी के स्मरण और देवी को सम्मान दिया जा सके।  फिर दिल्ली वापसी के लिए रामनाथपुरम के लिए निकल गए जहाँ से हमे ट्रैन पकड़नी थी।

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